September 11, 2008

पानी

पानी की औकात बस पानी की है;
साहिल हो करीब तोह दरिया कहलाता है
आंखों में हो तोह अश्क कहलाता है।

बहने दो मुझे, बस पानी हूँ मैं
लौट आऊंगा कभी बादल की तरह,
या फिर ग़म की घटा बनके।

मेहमान

चाँद देहलीज़ तक आ कर लौट गया कल रात
मुमकिन है मेरे घर के अंधेरों से डर गया, बेचारा।