November 16, 2010

Untitled

कोई पहचानी सी दस्तक, कुछ सुनी-सुनाई आवाजें बुला रहीं हैं,
पुरानी पगडंडियों पे चलते-चलते पाँव पे नए छाले पढ़ गए हैं।

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