December 3, 2012

Untitled


कूचा-कूचा, गली-गली, शहर-शहर वीराना हुआ
आज-कल तन्हाइयों से बेशुमार याराना हुआ।

उनके जाने से सारा आलम कुछ खफा-खफा सा है
सुना है बेवफाई का सर-ए-आम अफसाना हुआ।

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