Some poems. A lot of purgatory.
कुछ तारों के टुकड़े हाथ में लिएफिर रहा हूँ कबसे;मेरी उम्मीद की आखरी निशानी है यह।
नादानियत की भी हद तोह देखो, यारोंटूटते तारों से उम्मीदें बाँधने चला था मैं।
Post a Comment
No comments:
Post a Comment